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| यादें अब भी आबाद हैं |
वीरान है ये गाँव ,
तो क्या हुआ...
पेड़ों की शाखाएँ,
प्यार से हाथ पकड़ती हैं !
वो जो अपने अब नहीं हैं,
उनकी कहानी ये कहती हैं
माटी पाँवों से लिपटकर,
बार-बार दुलराती है..
वो कोयल अब भी,
मीठा गीत सुनाती है !
जब धूप की गर्मी होती है,
शीतल, मंद बयार अभी भी
माथे को सहलाती है!
अब वो नदिया नहीं सूखती,
हर पल कल-कल बहती है
जब भी बैठूँ उसके किनारे,
बातें पुरानी करती है!
सावन में तो अब भी,
बादल मस्ती करते हैं,
पहली बारिश की बूँदों से
माटी सोंधी कर जाते हैं !
इतने सारे प्यारे रिश्ते,
हर पल साथ निभाते हैं
आखिर इनको कैसे भूलें,
ये ही तो हैं जो अब,
उन यादों की याद दिलाते हैं!
--डॉ सीमा सिंह

Keep it up dear
ReplyDeleteThank you so much
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