| दिल्ली हिंसा 2020 |
चलो करते हैं बात मोहब्बत की,
बेवजह बैर क्यों बढ़ाया जाए !
फ़र्क क्या है ख़ून में दोनों के,
चलो ब्लड टेस्ट ही कराया जाए!
पत्थर हों या हों पेट्रोल बम, या
फेंकी तुमने तेज़ाब की थैली,
जो जले वो कौन थे...
हिन्दू भी थे, मुस्लिम भी थे
पर इससे भी पहले , सुनो..
.... वो सभी इन्सान थे !
ग़र खत्म ही करना है कुछ,
दिल की घृणा को मार दो !
पर मार दिया तुमने
अंकित और अशफ़ाक को,
राहुल, शाहिद, रतन लाल को!
नंगा नाच दिखाया तुमने,
अपनी हैवानियत का
चलो जेल में, पाठ पढ़ो..
थोड़ी सी इन्सानियत का!
तुम्हें मौज आती है ,
आशियाँ जलाने में ..
उनके आँसू कैसे सूखें,
जिनकी जमा पूँजी लग गई थी,
इन घरों को बनाने में !
अपने ही भाइयों का,
घर-दुकान क्यों जलाया जाए
बेघर हुए जो लोग हैं
उनका सहारा बनकर,
अमन चैन लौटाया जाए!
--डॉ सीमा सिंह
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